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पटना में बारिश के बीच अदा हुई ईद की नमाज, 20 साल में पहली बार गांधी मैदान नहीं पहुंचे मुख्यमंत्री, बेटे निशांत कुमार रहे मौजूद

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पटना। राजधानी पटना में ईद-उल-फितर का त्योहार इस बार कई मायनों में खास रहा। एक ओर जहां ऐतिहासिक गांधी मैदान में बारिश के बीच हजारों लोगों ने एक साथ नमाज अदा की, वहीं दूसरी ओर बीते दो दशकों में पहली बार ऐसा हुआ जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस आयोजन में शामिल नहीं हुए। उनके स्थान पर इस बार उनके पुत्र निशांत कुमार की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
सुबह से ही राजधानी का मौसम बदला हुआ था। आसमान में बादल छाए हुए थे और बीच-बीच में हल्की बारिश भी हो रही थी। इसके बावजूद नमाजियों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। बच्चे, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में गांधी मैदान पहुंचे और एक साथ नमाज अदा की। बारिश की फुहारों के बीच भी लोग अपनी जगह पर डटे रहे और पूरी श्रद्धा के साथ इबादत करते नजर आए। यह दृश्य आस्था, अनुशासन और एकजुटता का अद्भुत उदाहरण बन गया।
हालांकि इस बार सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी को लेकर रही। मुख्यमंत्री बनने के बाद से नीतीश कुमार हर साल ईद के मौके पर गांधी मैदान पहुंचते रहे हैं और नमाजियों के बीच उपस्थित होकर उन्हें बधाई देते रहे हैं। लेकिन इस बार बदलते राजनीतिक हालात के बीच उनकी अनुपस्थिति ने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया।
मुख्यमंत्री की जगह उनके बेटे निशांत कुमार कार्यक्रम में शामिल हुए। वे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गांधी मैदान पहुंचे। उनकी सुरक्षा में मुख्यमंत्री स्तर की सुरक्षा व्यवस्था देखी गई। उनके साथ जदयू के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे, जिनमें अशोक चौधरी प्रमुख रूप से शामिल रहे। मंच पर मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने निशांत कुमार का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें पारंपरिक गमछा ओढ़ाकर सम्मानित किया।
इस मौके पर निशांत कुमार ने सभी बिहारवासियों और देशवासियों को ईद की मुबारकबाद दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह त्योहार आपसी प्रेम, भाईचारे और एकता का प्रतीक है। उन्होंने अपने पिता की ओर से भी शुभकामनाएं देते हुए देश में अमन-चैन और खुशहाली की कामना की।
इधर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भले ही कार्यक्रम में शिरकत नहीं की, लेकिन उन्होंने एक संदेश जारी कर प्रदेश और देशवासियों, खासकर मुस्लिम समुदाय को ईद की बधाई दी। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में रोजेदारों द्वारा की गई इबादत समाज में शांति, सद्भाव और समृद्धि लाने का काम करती है। उन्होंने यह भी कामना की कि ईद का यह पावन अवसर सभी के जीवन में सुख-शांति और खुशहाली लेकर आए।
गांधी मैदान में आयोजित सामूहिक नमाज के दौरान एक विशेष पहल भी देखने को मिली। नमाज के बाद इमाम ने उपस्थित लोगों को एक अहम संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि माता-पिता का सम्मान करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है और यदि कोई अपने बुजुर्गों को दुख देता है, तो उसकी इबादत अधूरी रह जाती है। इस संदेश को लोगों ने गंभीरता से सुना और समाज में पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लिया।
पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही। गांधी मैदान के सभी प्रवेश द्वारों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी और नमाजियों को सघन जांच के बाद ही अंदर जाने दिया जा रहा था। प्रशासन की ओर से हर स्तर पर सतर्कता बरती जा रही थी, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग और अन्य इंतजाम भी किए गए थे।
राजधानी के अन्य हिस्सों में भी ईद की नमाज शांतिपूर्ण तरीके से अदा की गई। पटना जंक्शन जामा मस्जिद में बड़ी संख्या में नमाजी जुटे, जबकि फुलवारीशरीफ और आसपास के ईदगाहों में भी लोगों ने इबादत की। हर जगह एक ही संदेश गूंजता नजर आया—भाईचारा, प्रेम और सौहार्द।
इसके अलावा मसौढ़ी अनुमंडल क्षेत्र में भी सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। यहां कुल 39 स्थानों पर पुलिस और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई थी। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में रहा और हर गतिविधि पर नजर रखी गई।
बारिश के बावजूद जिस तरह से लोगों ने उत्साह के साथ नमाज अदा की, वह इस बात का प्रमाण है कि आस्था किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं पड़ती। इस बार की ईद ने जहां एक ओर सामाजिक एकता का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक रूप से भी एक नया संकेत छोड़ा।
कुल मिलाकर पटना में मनाई गई यह ईद कई मायनों में यादगार बन गई—बारिश के बीच उमड़ी आस्था की भीड़, मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति और उनके बेटे की मौजूदगी, साथ ही भाईचारे और पारिवारिक मूल्यों का मजबूत संदेश।

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